मध्यप्रदेश : जलवायु, वर्षा, पर्वत. पठार से सम्बंधित नोट्स – MPSI/Constable Exam के लिए अति-महत्वपूर्ण

मध्यप्रदेश में जलवायु

जलवायु तथा मोसम को निर्धारित करने वाले तीन कारक है |

  • वर्षा का समय तथा मात्रा |
  • हवा की गति की औसत अवस्था |
  • तापमान की स्थिति |
  • जब इन तीनो में जल्दी परिवर्तन होता है | तो उसे मौसम कहा जाता है |
  • जब इन तोनो में लम्बे समय बाद परिवर्तन होता है तो उसे जलवायु कहा जाता है |
  • म.प्र. की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक –

1)   समुद्र से दूरी :-

समुद्र से दूरी अधिक होने के कारण तापान्तर अधिक होता है |

2)  भूमध्य रेखा से दुरी

म.प्र.उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहाँ पर उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है |

3) कर्क रेखा का मध्य रेखा से गुजरना :

इसी कारण जून का महिना अधिक गर्म होता है |

4 ) पर्वतों की स्थिति :-

                सतपुड़ा पर्वत श्रेणी व् विध्यांचल पर्वत श्रेणी के कारण इन क्षेत्रो में वर्षा अधिक होती है | इन पर्वतों के पीछे स्थित मध्य भारत के पठारमें वर्षा कम होती है|

.प्रके जलवायु के आधार पर चार भागो में बांटा गया है

1) उत्तर का मैदान -: 1 . मध्य भारत का पठार

  1. बुंदेलखंड का पठार|
  2. रीवा पन्ना का पठार

यहाँ पर गर्मी में अधिक गर्मी व् ठण्ड में अधिक ठण्ड होती है |

2) मालवा का पठार:-

यहाँ पर सम जलवायु पाई जाती है | गर्मी में कम गर्मी व् ठण्ड में कम ठण्ड |

3 ) नर्मदा घाटी क्षेत्र :– यहाँ परमानसूनी प्रकार की जलवायु पायी जाती है | गर्मी में अधिक गर्मी व ठण्ड में साधारण ठण्ड |

4) विध्य का पठारी प्रदेश :- यहाँ पर गर्मी में कम गर्मी वठण्ड में अधिक ठण्ड |

इसके अंतर्गत पचमढ़ी व् अमरकंटक क्षेत्र आते है |

जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया :-

  • 21 मार्च तथा 23 सितम्बर को सूर्य भू-मध्य रेखा पर लम्बवत चमकता है |
  • इस समय दिन व् रात बराबर होते है | इस स्थिति को EQUINOX कहा जाता है |
  • 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण हो जाता है | इससे उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणें सीधी पडती है | व् दक्षिणी गोलार्द्ध में तिरछी पडती है | इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित देश भारत तथा म.प्र. में तापमान बढने के कारण गर्मी प्रारंभ हो जाती है |
  • 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है | इस कारण अत्यधिक तापमान बढ़ जाने के कारण यहाँ पर निम्न वायुदाब का क्षेत्र निर्मित हो जाता है |जिससे अधिक वायुदाब जल भाग से आने वाली आर्द्रतायुक्त पवने यहाँ पर आकर वर्षा करती है |
  • 23 सितम्बर के बाद सूर्य दक्षिणायण हो जाता है जिससे सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्द्ध में सीधी व् उत्तरी गोलार्द्ध में तिरछी होती है | इसीलिए भारत तथा म.प्र. में तापमान कम होता जाता है जबकि दक्षिण गोलार्द्ध में स्थित देशो में तापमान बढ़ता जाता है |
  • 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत चमकता है | इस समय भारत तथा मध्य प्रदेश में तापमान अत्यधिक कम हो जाता है |

मध्यप्रदेश में वर्षा

  • भारत तथा म.प्र. में मानसूनी प्रकार की जलवायु पाई जाती है | इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु भी कहते है | ”मानसून” शब्द अरबी भाषा का शब्द है |
  • म.प्र. में वर्षा का समय जून – सितम्बर
  • म.प्र. में वर्षा का औसत 100-200 cm
  • म.प्र. सामान्य वर्षा वाले क्षेत्र में आता है |
  • म.प्र. में अधिकांश वर्षा द.पू मानसून (अरब सागर )|से  होती है |
  • म.प्र. के पूर्वी भाग में वर्षा (विंध्य क्षेत्र ) में वर्षा द.पू मानसून (बंगाल की खाड़ी)से होती है |
  • म.प्र. में सर्वाधिक वाला स्थान – पंचमढ़ी (199 cm)|
  • म.प्र. में सर्वाधिक कम वर्षा वाला स्थान – भिंड (55cm)|
  • म.प्र. के पश्चिम भाग में 75 cm से कम व् पूर्वी भाग में 75 cm से अधिक वर्षा होती है |
  • म.प्र. में सर्वाधिक तापमान जून में होता है
  • सर्वाधिक ठण्डा स्थान – शिवपुरी (-3 0 c )
  • सर्वाधिक तापमान वाला क्षेत्र गंजवासोदा (48.97’c – 1995)|
  • ऋतु सम्बंधी आंकड़े एकत्रित करने वाली वेधशाला – इंदौर
  • म.प्र. का सर्वाधिक ठण्डा माह – जनवरी |

.प्रमें पर्वत

1 )विंध्याचल पर्वत श्रेणी :-

विश्व की सर्वाधिक प्राचीनतम पर्वत श्रेणी में से है | म.प्र.  की सबसे प्राचीन पर्वत श्रेणी है |

विस्तार :इसका विस्तार म.प्र.  के मध्य में नर्मदा नदी के उत्तर में पश्चिम से पूर्व तक |

  • अलीराजपुर, धार ,बडवानी ,इंदौर ,खरगोन ,खंडवा ,देवास, हरदा , सीहोर , होशंगाबाद ,नरसिंहपुर जबलपुर आदि जिलो में फैली हुई है |
  • नर्मदा नदी विंध्याचल पर्वत व् सतपुड़ा पर्वत के मध्य बहती है |
  • इसे अवशिष्ट पर्वत कहा जाता है |

 2 ) सतपुड़ा पर्वत श्रेणी -:

  • यह म.प्र. के दक्षिणी भाग में व् विंध्याचल पर्वत श्रेणी के दक्षिण भाग में तथा राजपिपला पर्वत श्रेणी के पूर्वी भाग में स्थित है |

विस्तार–खंडवा , बैतुल , छिंदवाड़ा , बालाघाट , सिवनीबुरहानपुर , मण्डला , होशंगाबाद का पंचमढ़ी, उमरिया ,शहडोल |

  • सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के उत्तर में महादेव पहाड़ी स्थित है | इसकी सबसे ऊँची चोटी धुपगढ़ पचमढ़ी में स्थित है यह म.प्र.की सबसे ऊँची चोटी है |

ऊंचाई -1350 m

3 ) मैकल पर्वत श्रेणी

  • यह म.प्र. के दक्षिण – पूर्वी भाग में तथा सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के पूर्वी भाग में स्थित है |
  • शहडोल , डिंडोरी , मण्डला ,( अनूपपुर )|
  • इस पर्वत श्रेणी से अमरकंटक से तीन नदियाँ निकलती है |- नर्मदा , सोन , जोहिला |

4 ) केमूर पर्वत श्रेणी

  • यह विंध्याचल पर्वत के पूर्वी भाग में स्थित है |
  • (कटनी ) सतना , रीवा , सीधी |
  • यह से टोंस नदी निकलती है |
  • यहाँ से चुना पत्थर निकाला जाता है |

5 ) भाण्डेर पर्वत श्रेणी -:

  • विन्ध्याचल पर्वत के पूर्वी भाग में |
  • जिले – छतरपुर , पन्ना

यहाँ से हीरा निकाला जाता है |

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